🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 100

The Book of Ayodhyā · Entry 100 of 664 · type: चौपाई

एक बिधातहिं दूषनु देंहीं। सुधा देखाइ दीन्ह बिषु जेहीं।। खरभरु नगर सोचु सब काहू। दुसह दाहु उर मिटा उछाहू।। बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी। जे प्रिय परम कैकेई केरी।। लगीं देन सिख सीलु सराही। बचन बानसम लागहिं ताही।। भरतु न मोहि प्रिय राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।। करहु राम पर सहज सनेहू। केहिं अपराध आजु बनु देहू।। कबहुँ न कियहु सवति आरेसू। प्रीति प्रतीति जान सबु देसू।। कौसल्याँ अब काह बिगारा। तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 100 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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