🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 197

The Book of the Aftermath · Entry 197 of 270 · type: चौपाई

तुम्ह सर्बग्य तन्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा।। ग्यान बिरति बिग्यान निवासा। रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा।। कारन कवन देह यह पाई। तात सकल मोहि कहहु बुझाई।। राम चरित सर सुंदर स्वामी। पायहु कहाँ कहहु नभगामी।। नाथ सुना मैं अस सिव पाहीं। महा प्रलयहुँ नास तव नाहीं।। मुधा बचन नहिं ईस्वर कहई। सोउ मोरें मन संसय अहई।। अग जग जीव नाग नर देवा। नाथ सकल जगु काल कलेवा।। अंड कटाह अमित लय कारी। कालु सदा दुरतिक्रम भारी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 197 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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