🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 249

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 249 of 273 · type: चौपाई

प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।। लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।। सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।। लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।। देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।। पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।। जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।। तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 249 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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